अमेरिका और ईरान जंग की संभावना पर मीडिया की राय 

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अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की संभावना को लेकर वर्तमान में तनाव बढ़ा हुआ है, लेकिन अधिकांश मीडिया स्रोतों के अनुसार, पूर्ण पैमाने पर युद्ध की संभावना कम है। जनवरी 2026 में ईरान में चल रहे बड़े विरोध प्रदर्शनों, जिनमें आर्थिक संकट और सरकारी दमन के खिलाफ आवाजें उठ रही हैं, के कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हस्तक्षेप की धमकी दी है। ट्रम्प ने कहा है कि अगर ईरान प्रदर्शनकारियों पर दमन जारी रखता है, तो अमेरिका “मजबूत कार्रवाई” कर सकता है, जिसमें सैन्य विकल्प शामिल हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह सीमित स्ट्राइक्स या साइबर ऑपरेशन्स तक रह सकता है, न कि पूर्ण युद्ध। पेश है विश्व प्रमुख और प्रभावी चैनलों और मीडिया के आधार पर विश्लेषण ।

ईरान में जनवरी 2026 से विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं, जहां सरकारी दमन में कम से कम 2,000 लोगों की मौत हो चुकी है और 10,000 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुई हैं। ट्रम्प प्रशासन ने इसे “मानवीय संकट” बताते हुए हस्तक्षेप की बात की है, और अमेरिका ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा भी की है। ईरान ने जवाब में कहा है कि वह “युद्ध या बातचीत” दोनों के लिए तैयार है, लेकिन अगर अमेरिका हमला करता है, तो वह अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई करेगा। अल जजीरा के अनुसार, ईरान ने अमेरिका को “हस्तक्षेप का बहाना बनाने” का आरोप लगाया है, जबकि ट्रम्प ने “मजबूत कार्रवाई” की चेतावनी दी है। इसी तरह, इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर की रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रम्प सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, जिसमें ईरान की परमाणु सुविधाओं या बैलिस्टिक मिसाइल साइटों पर स्ट्राइक्स शामिल हैं, लेकिन कोई हमला “कम से कम कुछ दिनों दूर” है।

मीडिया स्रोतों के अनुसार, पूर्ण युद्ध की संभावना कम है, लेकिन सीमित सैन्य कार्रवाई की आशंका बढ़ रही है। टाइम मैगजीन में विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रम्प सैन्य स्ट्राइक को पूरी तरह खारिज नहीं कर रहे, लेकिन रिजीम चेंज के लिए पूर्ण अभियान की संभावना नहीं है, क्योंकि इससे व्यापक युद्ध छिड़ सकता है। द गार्जियन का विश्लेषण है कि ट्रम्प के सैन्य विकल्प सीमित हैं, और कोई भी कार्रवाई प्रदर्शनकारियों की मदद करने की बजाय ईरान में राष्ट्रवादी भावना को मजबूत कर सकती है, जिससे रिजीम को फायदा हो सकता है। यूरोन्यूज में कहा गया है कि अगर अमेरिका या इजराइल हमला नहीं करते, तो ईरान का रिवोल्यूशनरी गार्ड खुद हमला शुरू कर सकता है, लेकिन यह “सीमित युद्ध” तक रह सकता है।

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप की रिपोर्ट में सलाह दी गई है कि अमेरिका को सैन्य हस्तक्षेप से बचना चाहिए और आर्थिक दबाव, जैसे प्रतिबंध से ईरान में बदलाव को बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि युद्ध से स्थिति और बिगड़ सकती है।

सीएनएन के अनुसार, ट्रम्प ने कई बार “रेड लाइंस” तय की हैं, लेकिन कोई भी सैन्य कार्रवाई प्रतीकात्मक हो सकती है, जो ट्रम्प की विश्वसनीयता को प्रभावित करेगी। पोलिटिको में उल्लेख है कि ट्रम्प के पास सैन्य विकल्प हैं, जैसे ईरानी नेतृत्व या सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक्स, लेकिन जून 2025 के “12-डे वॉर” के बाद अमेरिकी विकल्प और सीमित हो गए हैं, और कांग्रेस भी बड़े युद्ध के खिलाफ है।

रॉयटर्स, ईरान इंटरनेशनल के माध्यम से कहा गया है कि ईरान ने पड़ोसी देशों को चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका हमला करता है, तो वह उनके क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर हमला करेगा, जिससे क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बढ़ सकता है।डेमोक्रेसी नाउ में विशेषज्ञ वली नसर का कहना है कि अमेरिका पूर्ण युद्ध नहीं चाहता, बल्कि आर्थिक दबाव से ईरान में अशांति बढ़ाना चाहता है।

यदि कोई कार्रवाई होती है, तो यह जून 2025 की तरह सीमित स्ट्राइक्स, जैसे परमाणु साइटों या सुरक्षा बलों पर, तक रह सकती है, जैसा कि फोर्ब्स में बताया गया है। न्यू लाइंस इंस्टीट्यूट का मत है कि अमेरिकी हमला ईरान के रिजीम को मजबूत कर सकता है, क्योंकि इससे राष्ट्रवाद बढ़ेगा और प्रदर्शन रुक सकते हैं।

कुल मिलाकर, डिप्लोमेसी, जैसे ओमान के माध्यम से बातचीत, अभी भी संभव है, लेकिन अगर दमन बढ़ा, तो सीमित संघर्ष की आशंका है।

 

क़ौमी फरमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

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