(रईस खान)
महाराष्ट्र के हालिया नगर पालिका और महानगर पालिका चुनावों में मुस्लिम वोटर्स ने बड़ा रोल अदा किया है। मुस्लिम आबादी यहां करीब 11-12% है, लेकिन मुंबई जैसे शहरों में ये 18-20% तक पहुंच जाती है। ये वोटर्स लोकल इश्यूज जैसे पानी, सड़क, सफाई और डेवलपमेंट पर ज्यादा फोकस करते हैं। लेकिन इस बार उनका वोट स्प्लिट हो गया, जिससे भाजपा वाली महायुति को फायदा मिला। AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) ने मुस्लिम इलाकों में अच्छी कामयाबी हासिल की, जो मुस्लिम कम्युनिटी की नई लीडरशिप की तरफ इशारा करता है।
मुस्लिम वोटर्स का विश्लेषण
महाराष्ट्र में मुस्लिम वोटर्स की ताकत 35-50 विधानसभा सीटों पर निर्णायक है, जहां उनकी आबादी 20% से ज्यादा है। एक्जिट पोल्स जैसे Ascendia और Axis My India के मुताबिक, 2026 BMC चुनाव में मुस्लिम वोटर्स ने अलग-अलग पार्टियों को सपोर्ट किया: 41% कांग्रेस+, 28% उद्धव ठाकरे वाली शिवसेना+, और 11% BJP+ को। बाकी मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन और सपा जैसी पार्टियों में बंट गए। ये स्प्लिट ‘MaMu’ (मराठी + मुस्लिम) फैक्टर की कोशिश को नाकाम कर गया, जो ठाकरे गठबंधन ने ट्राई किया था।
पिछले 2025 लोकल बॉडी चुनावों में भी यही ट्रेंड दिखा। महायुति ने 207 बॉडी जीतीं, लेकिन मुस्लिम वोटर्स ने मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन को 83 काउंसिलर सीटें और 1 मेयर पोस्ट दिलाई। मुस्लिम कैंडिडेट्स कुल 19% थे, ज्यादातर मुस्लिम-डोमिनेटेड वार्ड्स में। भाजपा ने कोई मुस्लिम कैंडिडेट नहीं उतारा, जबकि कांग्रेस ने 37, सपा ने 46 और मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने 27। नतीजा ये हुआ कि मुस्लिम वोट अब एकजुट नहीं रहा, पहले MVA को ज्यादा जाता था, लेकिन अब बंट गया। हिंदू-मुस्लिम पोलराइजेशन की कोशिशें हुईं, मगर वोटर्स ने सिविक प्रॉब्लम्स को प्राथमिकता दी। जैसे कोस्टल रोड, मेट्रो प्रोजेक्ट्स से बीजेपी को कुछ मुस्लिम वोट मिले। कुल मिलाकर, मुस्लिम वोटर्स का असर पॉजिटिव रहा, उनका प्रतिनिधित्व बढ़ा, 10 मुस्लिम नगर पालिका प्रेसिडेंट चुने गए (3 औरंगाबाद से)। लेकिन बिखराव की वजह से मुख्य गठबंधनों को फायदा। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि मुस्लिम कम्युनिटी अब अपनी लीडरशिप चाहती है, जो लोकल मुद्दे सॉल्व करे, न कि सिर्फ वोट बैंक बने।
मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन, जो असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी है, महाराष्ट्र में तेजी से फैल रही है। 2025 चुनावों में पार्टी ने 74 वार्ड्स में लीड की, खासकर छत्रपति संभाजीनगर, धुले, अमरावती, जालना, मालेगांव और परभानी जैसे मुस्लिम-बहुल इलाकों में। बीएमसी 2026 में मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने 9 सीटें जीतीं, जो मुंबई में उसकी मजबूत एंट्री है। पार्टी का वोट शेयर बढ़ा, और वो मुस्लिम कम्युनिटी की चिंताओं जैसे रिप्रेजेंटेशन और डेवलपमेंट पर फोकस करती है।
इम्तियाज जलील, मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन महाराष्ट्र चीफ, ने कहा कि पार्टी 27 म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन्स में कंटेस्ट करेगी और लोकल अलायंस के लिए ओपन है। बिहार में 5 सीटें जीतने के बाद महाराष्ट्र में भी मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन का जोश जबरदस्त है। पार्टी मुस्लिम वोटर्स को बताती है कि दूसरी पार्टियां मुस्लिम लीडर्स को आगे बढ़ने नहीं देतीं, बल्कि उन्हें सिर्फ वोटर बनाकर रखती हैं। नतीजा, मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने 2025 में 82 सीटें जीतीं (155 पर लड़ी), जो 50% से ज्यादा स्ट्राइक रेट है। ये कामयाबी मुस्लिम यूथ को आकर्षित कर रही है।
कुछ जगहों पर मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने कांग्रेस और राजद जैसी पार्टियों को नुकसान पहुंचाया, क्योंकि मुस्लिम वोट बंट गया। लेकिन ओवैसी कहते हैं कि पार्टी डेवलपमेंट और मुस्लिम डिग्निटी के लिए लड़ती है। महाराष्ट्र में मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन का फैलाव दिखाता है कि मुस्लिम वोटर्स अब इंडिपेंडेंट लीडरशिप चाहते हैं।
महाराष्ट्र में मुस्लिम वोटर्स का ट्रेंड ये है कि वो बंट रहे हैं, लेकिन रिप्रेजेंटेशन बढ़ रहा है। मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन जैसी पार्टियां मुस्लिम लीडरशिप को बूस्ट दे रही हैं, जो दूसरी पार्टियों के लिए चैलेंज है। अगर मुस्लिम वोट कंसोलिडेट होता तो MVA को फायदा मिलता, लेकिन स्प्लिट से महायुति मजबूत हुई। आने वाले चुनावों में मुस्लिम कम्युनिटी लोकल इश्यूज और अपनी आवाज पर ज्यादा जोर देगी।

