पंद्रह अप्रैल की शाम को लखनऊ के विकास नगर की झुग्गी बस्ती में आग लग गई। तेज हवाओं और सिलेंडर ब्लास्ट की वजह से आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। सैकड़ों झोपड़ियां जलकर राख हो गईं, करीब एक हजार से ज्यादा गरीब मजदूर परिवार बेघर हो गए। दो मासूम बच्चियों की जान भी चली गई। राख के ढेर और खुले आसमान के नीचे रोती हुई मां-बहनों का मंजर देखकर किसी का भी दिल पसीज जाए।

लेकिन इस दुख की घड़ी में लखनऊ ने इंसानियत की रोशनी दिखाई। यूपी सरकार ने तुरंत संज्ञान लिया और अधिकारियों को युद्ध स्तर पर राहत पहुंचाने के हुक्म दिए। सरकार ने मरने वाली दो बच्चों के परिवारों को 4-4 लाख रुपये की मदद दी। प्रशासन ने अस्थायी आश्रय, खाना, पानी, मोबाइल टॉयलेट और मेडिकल कैंप की व्यवस्था की।
इसके अलावा कई सामाजिक संगठनों ने भी मदद का हाथ बढ़ाया। एएमयू ओल्ड ब्वॉयज एसोसिएशन, आरएसएस की सेवा इकाई, भारत डेवलपमेंट रिलीफ फाउंडेशन, सयाकूल फाउंडेशन और अन्य एनजीओ ने भोजन, पॉलीथीन शीट, बेडशीट, बर्तन और कपड़े बांटे। आम नागरिक भी कतारों में खड़े होकर पीड़ितों तक राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं।
खास तौर पर मुंबई से आए समाजसेवी हुसैन मंसूरी ने इस मुश्किल वक्त में गरीबों का सहारा बनकर दिखाया। वे खुद लखनऊ पहुंचे, झुग्गियों की राख देखकर भावुक हो गए और सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर किए। उन्होंने पीड़ित परिवारों को राशन किट्स, खाना, कपड़े, बर्तन और जरूरी सामान बांटा। हर परिवार तक खुद पहुंचकर उनकी तकलीफ सुनी। हुसैन मंसूरी ने कोई बड़ा कैंप नहीं लगाया, लेकिन मैदान में उतरकर सीधे मदद की।
फिर भी, अभी बहुत काम बाकी है। मलबा हटाना, स्थायी पुनर्वास और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्ती जरूरी है। गरीब बस्तियों में बिजली, गैस और सुरक्षा की व्यवस्था पर गंभीर ध्यान देने की जरूरत है।
विकास नगर की इस त्रासदी ने एक बार फिर साबित किया कि मुश्किल वक्त में इंसानियत की दीवार सबसे मजबूत होती है। सरकार, प्रशासन, एनजीओ और हुसैन मंसूरी जैसे नेक दिल लोग मिलकर पीड़ित परिवारों को नई जिंदगी देने में जुटे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही ये लोग अपनी पुरानी जिंदगी लौट सकेंगे।
क़ौमी फरमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

